डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्म "शोले" में जेलर की भूमिका निभाने वाले गोवर्धन असरानी आज 79 साल के हो गए हैं। अपनी अदाकारी और कॉमेडी से असरानी ने हर किसी का दिल जीता। 70 के दशक में उन्होनें ढेरों फिल्में बनाई और लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया।मुंबई में बहुत दिनों तक काम ढूंढने के बाद भी जब असरानी को कोई काम नहीं मिला तो उन्होनें पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में टीचर की नौकरी कर ली।

भले ही अब असरानी फिल्मों में काम नहीं करते हैं, लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों का उसी तरह मनोरंजन करती हैं जैसे कि पहले किया करती थी। एक इंटरव्यू के दौरान असरानी ने कहा था कि, उनका परिवार उन्हें सिनेमा में काम नहीं करने देना चाहते थे और पहली बार जब उन्होंने एक सिनेमा के पर्दे पर देखा तो परिवार ने उन्हें मुंबई से उठाकर वापस गुरदासपुर लेकर चले आए थे।
असरानी का फिल्मी सफर
सबको हसाने वाले असरानी का जन्म 1 जनवरी, 1941 को जयपुर में एक सिंधी परिवार में हुआ। वो बचपन से ही फिल्मों की ओर अपना रुझान रखते थे। जिसके कारण उन्होनें पढ़ाई के बाद 1963 में मुंबई आने का फैसला लिया और ऋषिकेश मुखर्जी और किशोर साहू के कहने पर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे में दाखिला ले लिया। साल 1964 में उन्होंने एक्टिंग का डिप्लोमा पूरा किया और फिर शुरू हुए फिल्मों में काम ढूंढने का सफर। पुणे से डिप्लोमा कर मुंबई लौटे असरानी को फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिले, लेकिन उनको पहली बार पहचान मिली फिल्म सीमा के एक गाने से।
असरानी की ब्लॉकबस्टर फिल्में
पिया का घर, मेरे अपने, शोर, सीता और गीता, परिचय, बावर्ची, नमक हराम, अचानक, अनहोनी जैसी फिल्मों के माध्यम से असरानी ने लोगों के दिल में अपनी छाप छोड़ दी। लोगों की हंसी ने असरानी को कॉमेडियन का दर्जा दिया जिसके बाद उन्होनें साल 1972 में आई फिल्म कोशिश और चैताली में निगेटिव किरदार निभाया।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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